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राजस्थान के पशु मेले/ Rajasthan ke Pramukh pashu mele

राजस्थान में पशुपालन और संस्कृति के संगम के रूप में राज्य स्तरीय 10 प्रमुख पशु मेले पशुपालन विभाग द्वारा आयोजित किए जाते हैं। प्रमुख मेलों में वीर तेजाजी, बलदेव, रामदेव, मल्लीनाथ, गोगामेड़ी, चंद्रभागा, गोमती सागर, जसवंत, महाशिवरात्रि पशु मेला और पुष्कर शामिल हैं।

ये मेले न केवल पशु व्यापार, बल्कि राजस्थानी संस्कृति, लोक कला और पर्यटन को बढ़ावा देते हैं। राजस्थान राज्य स्तरीय पशु मेला में अधिकांश मेले लोक देवी देवताओं एवं महान पुरुषों के नाम से जुड़े हुए हैं

  • सर्वाधिक पशु मेलों का आयोजन अब नए जिलों के गठन के बाद झालावाड़ में होता है (पहले नागौर था)।
  • आय की दृष्टि से सबसे बड़ा पशु मेला जसवंत पशु मेला (भरतपुर) है।
  • एशिया का सबसे बड़ा और प्रसिद्ध गधों का मेला लूणियावास (जयपुर) में आयोजित होता है
  • गोगामेड़ी पशु मेला राजस्थान का सबसे लम्बा (1 महीना) चलने वाला पशु मेला है।

पुष्कर पशु मेला (अजमेर) :– पुष्कर पशु मेला, कार्तिक पूर्णिमा के आसपास पुष्कर, अजमेर में आयोजित होता है, जो ऊंट और घोड़ों के व्यापार के लिए प्रसिद्ध है। पुष्कर पशु मेला दुनिया का सबसे बड़ा ऊंट मेला माना जाता है। राजस्थान का सबसे रंगीन और प्रसिद्ध मेला पुष्कर ऊंट मेला (Pushkar Camel Fair) है। इस मेले में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी आते हैं। देशी-विदेशी पर्यटक अपने को पवित्र करने के लिए पुष्कर झील में स्नान करते हैं। पुष्कर पशु मेला, गिर नस्ल से संबंधित है।

वीर तेजाजी पशु मेला (परबतसर, डीडवाना -कुचामन):- वीर तेजाजी पशु मेला, लोक देवता वीर तेजाजी की याद में भाद्र शुक्ल दशमी (तेजा दशमी) को परबतसर में भरता है। पशुपालन विभाग ने इस मेले के आयोजन की बागडोर सन 1947 में अपने हाथ में ली थी। 1734 में जोधपुर के महाराजा अजीत सिंह ने यहां तेजाजी का देवल बनाकर एवं उनकी मूर्ति स्थापित कर इस पशु मेले की शुरुआत की थी। यह मेला नागौरी बैलों एवं बीकानेरी ऊंटों के क्रय-विक्रय के लिए प्रसिद्ध है।

चंद्रभागा पशु मेला (झालरापाटन, झालावाड़):- पशुपालन विभाग द्वारा चंद्रभागा पशु मेला झालरापाटन में कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) से माघ कृष्ण पंचमी के बीच में चंद्रभागा नदी के तट पर 1958 से प्रतिवर्ष आयोजित किया जा रहा है। ये मेला मालवी नस्ल के बैलों के लिए प्रसिद्ध है।

गोमती सागर पशु मेला (झालरापाटन, झालावाड़):- गोमती सागर पशु मेला, वैशाख शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी से शुरू होकर ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की पंचमी तक झालरापाटन कस्बे की गोमती सागर की तल में पशुपालन विभाग 1559 से प्रतिवर्ष आयोजित कर रहा है।गोमती सागर पशु मेला हाड़ौती अंचल का सबसे बड़ा मेला है। मालवी नस्ल के पशुओं के लिए विख्यात है।

मल्लीनाथ पशु मेला (तिलवाड़ा, बालोतरा):– मल्लीनाथ पशु मेला, राजस्थान का सबसे पुराना पशु मेला माना जाता है, जो वीर योद्धा रावल मल्लिनाथ की स्मृति में तिलवाड़ा,बालोतरा में लूणी नदी के तट पर प्रतिवर्ष चैत्र कृष्ण एकादशी से चैत्र शुक्ल एकादशी तक आयोजित किया जाता है। ये पशु मेला सांचोरी बैलों के अलावा मालानी नस्ल के घोड़े और ऊंठ के लिए प्रसिद्ध है। थारपारकर (मुख्यतः) व कॉकरेज नस्ल की गाय की बिक्री होती है। इस मेले का संचालन पशुपालन विभाग ने सन 1958 से संभाला था

बलदेव पशु मेला (मेड़ता सिटी, नागौर):– बलदेव पशु मेला नागौरी नस्ल के बैलों के लिए प्रसिद्ध है। ये यह पशु मेला प्रसिद्ध किसान नेता श्री बलदेव राम जी मिर्धा की स्मृति में अप्रैल 1947 से राज्य का पशुपालन विभाग द्वारा प्रतिवर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से लेकर चैत्र शुक्ल पूर्णिमा तक आयोजित किया जाता है।

गोगामेड़ी पशु मेला (नोहर, हनुमानगढ़):- यह गोगाजी की स्मृति में आयोजित होता है। लोक देवता गोगा जी का समाधि स्थल पर प्रतिवर्ष श्रावण पूर्णिमा से भाद्रपद पूर्णिमा तक आयोजित किया जाता है। गोगामेड़ी पशु मेला राजस्थान का सबसे लम्बा (1 महीना) चलने वाला मेला है। इस मेले के संचालन का काम पशुपालन विभाग द्वारा अगस्त 1559 से हो रहा है। ये मेला राठी नस्ल की गाय के लिए प्रसिद्ध है।

रामदेव पशु मेला (मानसर, नागौर):- रामदेव पशु मेला नागौर के मानसर गांव में प्रतिवर्ष माघ शुक्ल 1 से माघ पूर्णिमा तक लगता है। इस मेले में नागौरी नस्ल के बैलों की बड़ी मात्रा में बिक्री होती है। फरवरी 1958 से पशुपालन विभाग इस मेले का संचालन कर रहा है।

महाशिवरात्रि पशु मेला (करौली):– महाशिवरात्रि पशु मेला करौली में महाशिवरात्रि (फाल्गुन कृष्णा) को प्रतिवर्ष लगता है। मेले में हरियाणवी नस्ल के पशुओं की बिक्री बहुत होती है। महाशिवरात्रि पशु मेला एकमात्र पशु मेला जहाँ पशुओं के साथ-साथ लोगों का (माल) मेला भी लगता है।

जसवंत पशु मेला (भरतपुर):- जसवंत पशु मेले की शुरुआत 1920 में भरतपुर रियासत के राजा किशन सिंह ने महाराजा जसवंत सिंह की याद में आश्विन शुक्ल 5 से 14 तक जसवंत पशु मेले का भरतपुर में आयोजित किया। इस मेले में हरियाणा नस्ल के बैलों की कई सारी प्रतियोगिता होती है। अक्टूबर 1958 से पशुपालन विभाग पशु मेले को आयोजित कर रहा है। आय की दृष्टि से सबसे बड़ा पशु मेला जसवंत पशु मेला (भरतपुर) है।

बहरोड़ पशु मेला :– कोटपुतली-बहरोड़ जिले में आयोजित होता है। मुर्राह भैंस का व्यापार होता है।

सेवडिया पशु मेला :- सेवाडिया पशु मेला (आपेश्वर महादेव पशु मेला) राजस्थान के जालौर जिले के रानीवाड़ा में आयोजित होने वाला एक प्रमुख 7-दिवसीय ऐतिहासिक मेला है।

बाबा रधुनाथ पुरी पशु मेला :- राजस्थान के सांचौर (माखुपुरा) में आयोजित बाबा रघुनाथपुरी विराट पशु मेला एक प्रमुख पारंपरिक आयोजन है, जहाँ ऊंट, घोड़े और बैलों की बड़ी खरीद-फरोख्त होती है।

बड़ली भेरू पशु मेला :- बड़ली भेरू पशु मेला जोधपुर में आयोजित होता है।

भावगढ बांधया मेला/लूणियावास पशु मेला(जयपुर):- एशिया का सबसे बड़ा और प्रसिद्ध गधों का मेला लूणियावास (जयपुर) में आयोजित होता है।